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| Image-Sief Tumko hi chaha-shayari ka khajana |
किसीको क्या बताये की
कितने मजबूर हैं हम..
चाहा था सिर्फ ऐक तुमको और
अब तुमसे ही दूर है हम...!
बना गुलाब तो कांटे चुभा गया इक शख्स
हुआ चराग तो घर ही जला गया इक शख्स
मोहोब्बत भी अजब उस की नफरते भी कमाल
मिरी ही तरह का मिझ में समां गया इक शख्स.
ऐक पल भी चैन से गुजरा हो तो कसम ले लो
सिवाय यादो के कोई और सहारा हो तो कसम ले लो,
पहले तो बात और थी जो तूम पे हक जताते थे हम,
अब तो खुद पैर भी कोई हक हमारा हो तो कसम ले लो
तुम ही ने कहा था के तुम्हारे लबो पर मेरा ही नाम आये,
उस के बाद जो लिया हो नाम किसी का तो कसम ले लो..
